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दूरसंचार में 100 फीसदी FDI, बकाया भुगतान में 4 साल की छूट

नई दिल्ली। केन्द्रीय कैबिनेट ने बुधवार को टेलीकॉम और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए राहत पैकेज मंजूर करते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले किए। टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर बकाया भुगतान में चार वर्ष की छूट, सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना शामिल है। हालांकि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को मंजूरी देते समय पाकिस्तान और चीन जैसे देशों को इससे बाहर रखा गया है।

केन्द्रीय मंत्रियों अश्विनी वैष्णव तथा अनुराग ठाकुर ने प्रेस कांफ्रेंस में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों को बकाया भुगतान में राहत देने के साथ-साथ गैर-दूरसंचार राजस्व को एजीआर से बाहर रखने का बड़ा फैसला किया है। हालांकि इस दौरान उन्हें ब्याज चुकाते रहना होगा। एजीआर वह लाइसेंस शुल्क है जो सेवा प्रदाता कंपनियां सरकार को देती हैं।

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लंबे समय से हो रही थी मांग
सभी गैर-दूरसंचार राजस्व को एजीआर से बाहर रखा गया है। इस पर लंबे समय से टेलीकॉम कंपनियों व सरकार के बीच विवाद था। स्पेक्ट्रम शुल्क को युक्तिसंगत बनाने का भी फैसला किया गया है। इससे भी कंपनियों को राहत मिलेगी।

टेलीकॉम कंपनियों को होंगे ये फायदे
रोजगार बढ़ेगा : रोजगार के नए अवसर पैदा करने, उपभोक्ताओं के हित रक्षा, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, निवेश लाने में मदद, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को राहत मिलेगी।

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कंपनियों को राहत : इस फैसले से वोडाफोन-आइडिया को लाभ होगा जो दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई है। एजीआर बकाया भुगतान के लिए चार साल की छूट मिलने का सीधा लाभ इन्हें मिलेगा।

देना होगा ब्याज : फैसले में एजीआर बकाया पर चार वर्ष का मोरेटोरियम है। हालांकि इस दौरान सेवा प्रदाता कंपनियों को ब्याज भुगतान करना होगा।

सुधरेगी आर्थिक सेहत : टेलीकॉम कंपनियों के लिए सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी से सेवा प्रदाताओं को अपनी आर्थिक सेहत सुधारने का मौका मिलेगा। फिलहाल कंपनियां गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही हैं।

उपभोक्ताओं को हो सकते हैं ये 5 फायदे

  • टेलीकॉम कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और मोबाइल का बिल बढ़ने की आशंका भी कम होगी।
  • 2जी ग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा। महंगे 4जी मोबाइल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • वोडाफोन-आइडिया के 15 करोड़ 2जी ग्राहकों के पास केवल एयरटेल का विकल्प बचा था, चूंकि जियो 2जी सपोर्ट नहीं करता है।
  • प्रीपेड से पोस्ट पेड और पोस्ट पेड से प्रीपेड में कन्वर्ट होने पर फ्रेश केवाईसी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • सरकार के पास बड़ा स्पेक्ट्रम फ्री, इससे रिजर्व प्राइस कम कर टेलीकॉम आपरेटर्स को देना चाहिए ताकि लोगों को सस्ती सेवाएं मिले।


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